इस ब्लॉग में आप एक ऐसे वर्ग और क्लास के बारे में पढङ्गे जो अमीर और गरीब के बीच पिस्ता एक संस्कारो और नियमो को पकड़े और इजज्जत को थामे आज भी बेबस खड़ा हैं। साथ ही दोनों वर्गों अमीर और गरीब को पालने के लिए टैक्स भी सच्चा देता हैं।
मिडिल क्लास यानी बीच की क्लास वर्ग। न तो अमीर और न ही अत्यंत गरीब। कुल मिलाकर गेहू वाली बिरादरी। जो दो पाटों के बीच पिस्ता हैं। ठीक वैसे ही दो वर्गों के बीच पीसने वाली बिरादरी या वर्ग या क्लास।
मैं भी एक मिडिल क्लास परिवार से हूँ। मैं जानता हूँ कि मिडल क्लास परिवार में पैदा होना ही सबसे बड़ी सजा हैं। मुझे अगर यह क्लास सबसे ज्यादा बेबस और मजबूर क्लास लगती हैं। एक तरफ मजबूत और धनपति वर्ग तो दूसरी तरफ अत्यंत दयनीय जीवन जीने को मजबूर वर्ग। मैं उस दीवार पर बैठा एक व्यक्ति हूँ जिसके एक तरफ चकाचोंध और अमीरी की चाबी लेकर इंसान पैदा होता हैं। तो दूसरी तरफ मेले कुचले झुगी झोपड़ीयो में टपकते पानी और सड़ांध के बीच जैसे तैसे जीवन बसर को लड़ते मजबूर लाचार वर्ग जिसको अक्सर गली मिलती है। नाली के कीड़े।
बीच मे बचा मैं अर्थात मिडिल क्लास जो कि दोनों का मिश्रण वाला क्लास। न तो पूरी अमीरी और न ही पूरी गरीबी। मतलब साला यह समझ मे नही आ रहा हैं कि क्यो बने इस क्लास के हिस्से।
मैं मिडिल क्लास की काली सच्चई दुनिया के सामने लाकर सभी मिडिल क्लास के युवाओ को साथ आने का आह्वान करता हूँ।
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